| Specifications |
| Publisher: Educational Book Service, Delhi | |
| Author Nisha Yadav | |
| Language: Hindi | |
| Pages: 142 | |
| Cover: HARDCOVER | |
| 9x6 inch | |
| Weight 270 gm | |
| Edition: 2018 | |
| ISBN: 9789380945972 | |
| HBR480 |
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आज का युवामन किसी-न-किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ है। मौजूदा दौर में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर पद्धति की बढ़ी हुई चुनौती ने युवाओं के समक्ष विषय के ज्ञान पर आधारित सटीक और संतुलित सामग्री जुटाने का श्रमसाध्य विकल्प खड़ा कर दिया है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी शोध और शिक्षण कार्य के लिए प्रतियोगी परीक्षा मंजिल तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता रह गया है। यूजीसी नेट जेआरएफ की परीक्षा से लेकर विश्वविद्यालयों द्वारा पी-एचडी उपाधि के लिए ली जाने वाली परीक्षा, यूपीएससी, और एसएससी सहित हिन्दी भाषा और साहित्य आधारित अनेकानेक परीक्षाओं के लिए सटीक और सारगर्भित वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर सामग्री की दरकार है।
ऐसे में जब चारों ओर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर परीक्षा पद्धति का बोलबाला हो तब 'हिन्दी भाषा और साहित्य का वस्तुनिष्ठ इतिहास विषय के प्रतियोगियों और शोधार्थियों के लिए गागर में सागर साबित होगी हिंदी भाषा और साहित्य का वस्तुनिष्ठ इतिहास इसी उद्देश्य के साथ आपके हाथों में यह पुस्तक पहुँची है कि युवाओं को विषय तैयारी के लिए इधर-उधर ज्यादा न भटकना न पड़े और सटीक सामग्री के माध्यम से न्यूनतम समय में अधिकतम परीक्षा तैयारी की जा सके।
"हिन्दी भाषा और साहित्य का वस्तुनिष्ठ इतिहास" नामक प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी भाषा के उदभव और विकास क्रम पर रोशनी डालने का काम हुआ है। हिन्दी साहित्य के चार कालखंडों में से तीन कालक्रम मौजूदा पुस्तक में दिये गए हैं। जबकि हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को रेखांकित करते हुए, हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल का वस्तुनिष्ठ इतिहास नामक पुस्तक में दिया गया है। इस पुस्तक की अगली कड़ी के तौर पर प्रकाशित भाग दो में भी वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर पद्धति को केंद्रित करते हुए एक हजार प्रश्न-उत्तर समाहित किए गए हैं। इस तरह दो पुस्तकों के सेट में हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास से लेकर हिंदी साहित्य के चारों कालखंडों को समाहित करने का प्रयास हुआ है।
कड़ी मेहनत और लगन के साथ पुस्तक को त्रुटि रहित बनाने के लिए प्रयास किया है लेकिन किसी तरह की खमी अथवा सुझाव के लिए सदैव आपका स्वागत है। ताकि भविष्य में आप तक और प्रभावी सामग्री दस्तावेजी रूप में पहुँचाना सुनिश्चित हो सके। पुस्तक लेखन में हिन्दी भाषा और साहित्य के विद्वतजनों से सलाह-मशविरा और सुझाव लिए गए हैं।
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