| Specifications |
| Publisher: Prakhar Goonj Publications, Delhi | |
| Author Shyam Bihari Agarwal | |
| Language: Hindi | |
| Pages: 115 (With B/W illustration) | |
| Cover: PAPERBACK | |
| 8.5x5.5 inch | |
| Weight 146 gm | |
| Edition: 2024 | |
| ISBN: 9789362103901 | |
| HBH420 |
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डॉ. श्यामबिहारी अग्रवाल भावुक लेखक, प्रबुद्ध कलाकार तथा सहृदय शिक्षक के रूप में कला-जगत सुपरिचित है। कोलकाता के गर्वमेंट कालेज ऑफ आर्ट एण्ड क्राफ्ट से पाँच वर्षीय स्नात्कोत्तर डिप्लोमा के बाद आपप्ने जनवरी 1968 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चित्रकला विभाग में अपने कला गुरू क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार जी के स्थान को लेक्चरर के रूप में सुशोभित किया और आपके सप्रयत्नों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में चित्रकला की स्नातक एवं स्नातकोत्तर और बी.एफ.ए., एम.एफ.ए. कक्षाओं का शुभारम्भ हुआ और शोध कार्य का प्रारम्भ हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने सन् 1979 में डॉ. अग्रवाल को, उनके शोध प्रबन्ध 'भारतीय चित्रकला में रीतिकालीन साहित्य की अभिव्यक्ति' पर डी. फिल. उपाधि से उन्हें विभूषित किया। इलाहाबाद दृश्य कला विभाग के आचार्य पद से 2003 में सेवा से निवृत्त होने के पश्चात वे प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से जुड़े और अध्यक्ष के रूप में दृश्य कला संकाय की स्थापना की। आप ने इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में विजटिंग प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया। वरिष्ठ कलाकार एवं प्रशिक्षक के रूप में भारतवर्ष के सांस्कृतिक केंद्रों, ललित कला अकादमी, संग्रहालयों एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों के कार्यशालाओं एवं सेमिनारों में प्रतिभागिता की और अपनी कार्यकुशलता एवं विद्वता की अमिट छाप छोड़ी।
डॉ. श्यामबिहारी अग्रवाल
डॉ. अग्रवाल उत्तर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा राज्य ललित अकादमी, लखनऊ के सदस्य हुए और अपने कार्यकाल में नवोदित कलाकारों के उन्नयन हेतु सक्रिय कार्य किया। मनोनीत अकादमी से प्रकाशित 'कला त्रैमासिक' का सम्पादन किया और महान संत चित्रकार क्षितीन्द्रनाथ र महान अकादमी के अनेक कला कार्यशालाओं एवं प्रदर्शनियों का सफल संचालन किया। डॉ. अग्रवाल निरंतर शोध कार्य से जुड़े हुए हैं और विभिन्न विश्वविद्यालयों के शैक्षिक एवं शोध कार्य समितियों के सदस्य मनोनीत हैं। आपको महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, कानपुर विश्वविद्यालय और अब ध विश्वविद्यालय ने अपने अन्तर्राष्ट्रीय कला शिविर में कलाकार के रूप में डॉ. अग्रवाल को विशेष रूप से सम्मानित किया।
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