| Specifications |
| Publisher: RACHNAKAR PRAKASHAN, PURNIA | |
| Author Chandra Kishore Jayaswal | |
| Language: Hindi | |
| Pages: 126 (with B/W Illustrations) | |
| Cover: HARDCOVER | |
| 9.0x6.0 Inch | |
| Weight 270 gm | |
| Edition: 2003 | |
| ISBN: 8187761067 | |
| HCB652 |
| Delivery and Return Policies |
| Usually ships in 3 days | |
| Returns and Exchanges accepted within 7 days | |
| Free Delivery |
समकालीन यथार्थ
की समता और वक्ता के साय कथा-साहित्य में उपस्थित करने वाले रचनाकारों में चन्द्रकिशोर
जायसवाल की एक मौलिक तया प्रखर पहचान है। देशज सच्चाइयों की रचनात्मक पड़ताल और नवीन
परिवर्तनों के घमासान की कलात्मक समीक्षा ने उन्हें हमारे समय के महत्वपूर्ण कथाकार
के रूप में प्रतिष्ठित किया है। हिन्दी कहानी में अपनी जातीय अस्मिता और लोक संस्कृति
से संवलित चन्द्रकिशोर जायसवाल की कहानियों ऐसा संसार रचती हैं, जिसमें आत्मीयता की
ऊष्मा है, जहाँ का सब कुछ एकदम परिचित है, फिर भी हमारे अब तक के अनुभवों को समृद्धि
मिलती है। उनकी रचनाएँ पाठकों को एक नए समाजशास्त्र के अलक्षित व अव्याख्यायित पक्षों
से परिचित कराती हैं। चन्द्रकिशोर जायसवाल अपने समय और समाज में चल रहे विमर्शों के
प्रति अत्यन्त सजग और सतर्क कथाकार हैं। आंचलिकता की सघन प्रस्तुति एवं व्यापक राष्ट्रीय
सरोकारों के पक्ष में उसका अतिक्रमण चन्द्रकिशोर जायसवाल की सर्जनात्मक शक्ति को रेखांकित
करता है। उपभोक्तावाद, नव पूंजीवाद, सत्तामूलक कदाचार की क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं से
उनका बहुआयामी संवाद सम्भव हुआ है और आवश्यकतानुसार सक्रिय प्रतिरोध भी अंकित हुआ है।
इस क्रम में उन्होंने भाषा से अद्भुत काम लिया है। भाषा के रचाव से जिस कथारस की सृष्टि
हुई है, उससे संप्रेषणीयता का पर्याप्त संवर्द्धन हुआ है। परम्परा और आधुनिकता का सहभाग
चन्द्रकिशोर जायसवाल के रचना संसार की दीप्तिमान विशेषता है। आयातित मुहावरों के स्थान
पर अपनी जमीन से उपजे वास्तव का कलात्मक विश्लेषण जायसवाल को पठनीय और सम्माननीय बनाता
है। चन्द्रकिशोर जायसवाल के कथा-साहित्य से गुजरना अपने समय के बीहड़ यथार्थ के बीच
से गुजरने की तरह है। इसमें जीवन का व्यापक यथार्थ-बोध और अदम्य आशावाद है। जीवन की
निरन्तरता की खोज में उन्होंने हिन्दी साहित्य को अनेक कालजयी कहानियाँ दी हैं।
चन्द्रकिशोर
जायसवाल जन्म : 1940, बिहारीगंज (मधेपुरा) शिक्षा : एम.ए. (अर्थशास्त्र)
कृतियाँ उपन्यास : गवाह गैरहाजिर, जीबछ
का बेटा बुद्ध, शीर्षक,
चिरंजीव । कहानी-संग्रह:
मैं नहिं माखन खायो,
मर गया दीपनाथ, हिंगवा
घाट में पानी रे!,
जंग, दुखिया दास कबीर, किताब
में लिखा है। नाटक
: सिंहासन, शृंगार, आखिरी ईंट (रूपान्तर)।
फिल्म : राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम द्वारा निर्मित
फिल्म 'रूई का बोझ'
(प्रथम उपन्यास 'गवाह गैरहाजिर' पर
आधारित)।
Send as free online greeting card
Visual Search